हित ध्रुव यह रस मधुर है - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियां (13)

हित ध्रुव यह रस मधुर है - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियां (13)

हित ध्रुव यह रस मधुर है, सार कौ सार अगाधा।
आवै जबहि हिय में, कृपा करै वल्लभ श्रीराधा॥

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियां (13)

यह मधुर रस उपासना समस्त साधनों का सार और अगाध तत्त्व है। यह हृदय में तभी प्रकट होती है जब युगल सरकार श्री राधा-वल्लभ अपनी कृपा बरसाते हैं।