कृपा तुम्हारी तन में मन में,  बचनन सदा विराजै  - श्री किशोरी अलि, श्री स्वामीनी जू की कृपा प्रताप (1)

कृपा तुम्हारी तन में मन में, बचनन सदा विराजै - श्री किशोरी अलि, श्री स्वामीनी जू की कृपा प्रताप (1)

कृपा तुम्हारी तन में मन में,  बचनन सदा विराजै ।
मोसे दीनहीन पर स्वामिनी, कृपा तुम्हारी छाजै ॥

- श्री किशोरी अलि, श्री स्वामीनी जू की कृपा प्रताप (1)

हे स्वामिनी श्री राधे! आपके तन, मन और वचनों में सदा करुणा ही विराजती है। मुझ जैसे दीन-हीन पर भी आपकी असीम कृपा निरंतर बरसती रहती है।