नान्यागति: कृष्णपदारविन्दात -  जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दश्श्लोकी (8)

नान्यागति: कृष्णपदारविन्दात - जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दश्श्लोकी (8)

नान्यागति: कृष्णपदारविन्दात, संदृश्यते ब्रह्मशिवादिवन्दितात् ।
भक्तेच्छयोपात्तसुचिन्त्यविग्रहा - दचिंत्यशक्तेरविचिंत्यसाशयात् ॥

- जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दश्श्लोकी (8)

जिसकी शक्ति और आशय का किसी को पता ही नहीं लग सकता फिर भी वे भक्तों की इच्छा के लिए अनेक अवतार धारण करते है। जिनकी ब्रह्मा शंकर आदि समस्त देवता वंदना करते है, उन श्रीराधाकृष्ण के चरणकमलों के अतिरिक्त मै कोई सहारा नहीं देखता ।