(राग कालिंगड़ा)
युगल लाल रसना रट मनुआ यही कलि में धन तेरो ।
अनत कहाँ भटकत तू डोले कर श्री वनहिं बसेरो ॥ [1]
टूक मांगकै उदर जु भर लै कहा मान यह मेरो ।
ललित लड़ैती चरण शरण रहु जासों होय निबेरो ॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (32)
हे मन, इस कलिकाल का वास्तविक धन यही है कि युगल लाल के नाम का भजन कर । तू अन्य कहाँ भटकता हुआ फिर रहा है अब तू केवल श्री वृंदावन का वास कर । [1]
तुझे यदि भूख लगे तो ब्रजवासियों की मधुकरी लेकर अपना उदर पोषण कर ले । श्री ललित लड़ैती कहते हैं कि तू श्री किशोरी जी के चरणों की शरण में रह इसीसे तेरा कल्याण होना है । [2]
युगल लाल रसना रट मनुआ यही कलि में धन तेरो ।
अनत कहाँ भटकत तू डोले कर श्री वनहिं बसेरो ॥ [1]
टूक मांगकै उदर जु भर लै कहा मान यह मेरो ।
ललित लड़ैती चरण शरण रहु जासों होय निबेरो ॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (32)
हे मन, इस कलिकाल का वास्तविक धन यही है कि युगल लाल के नाम का भजन कर । तू अन्य कहाँ भटकता हुआ फिर रहा है अब तू केवल श्री वृंदावन का वास कर । [1]
तुझे यदि भूख लगे तो ब्रजवासियों की मधुकरी लेकर अपना उदर पोषण कर ले । श्री ललित लड़ैती कहते हैं कि तू श्री किशोरी जी के चरणों की शरण में रह इसीसे तेरा कल्याण होना है । [2]

