अहो लड़ैती विन कहे जानि लेऊ जिय बात -  श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (11)

अहो लड़ैती विन कहे जानि लेऊ जिय बात - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (11)

अहो लड़ैती विन कहे, जानि लेऊ जिय बात ।
चरण तिहारे संग विन, मोहि न कछु सुहात ॥

- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (11)

हे लड़ैती [श्री राधा]! बिना कहे ही मेरे हृदय की बात जान लीजिए—आपके चरणों के संग बिन मुझे कुछ भी सुहाता नहीं।