महा रूप रस माधुरी, दंपति केलि विलास ।
विपुल वनोदनि निरखिहीं, श्री स्वामी हरिदास ॥
- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (55)
श्री वृन्दावन निकुंज-महल में महारूप एवं महारस-माधुरी की वर्षा होती है, जहाँ दिव्य दंपति केली-विलास करते हैं। उस विपुल 'नित्य विहार' को श्री स्वामी हरिदास जी (एवं विट्ठल विपुल देव जी) नित्य ही निरखते रहते हैं।
विपुल वनोदनि निरखिहीं, श्री स्वामी हरिदास ॥
- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (55)
श्री वृन्दावन निकुंज-महल में महारूप एवं महारस-माधुरी की वर्षा होती है, जहाँ दिव्य दंपति केली-विलास करते हैं। उस विपुल 'नित्य विहार' को श्री स्वामी हरिदास जी (एवं विट्ठल विपुल देव जी) नित्य ही निरखते रहते हैं।

