कीजिय ये दृढ़ चित्त में, तज दारा सुत वित्त -  श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृंदावन अष्टक (26)

कीजिय ये दृढ़ चित्त में, तज दारा सुत वित्त - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृंदावन अष्टक (26)

कीजिय ये दृढ़ चित्त में, तज दारा सुत वित्त ।
कहैं लालबलबीर जू, बस वृंदावन नित्त ॥

- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृंदावन अष्टक (26)

मन में दृढ़ता भरकर, पत्नी, बच्चों एवं धन-संपत्ति के मोह का त्याग कर श्री वृन्दावन धाम में नित्य वास करना चाहिए।