निधुवन द्रुम डारिन कवै, ह्वैहौं पक्षी कीर -  ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (66)

निधुवन द्रुम डारिन कवै, ह्वैहौं पक्षी कीर - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (66)

निधुवन द्रुम डारिन कवै, ह्वैहौं पक्षी कीर ।
राधारमणलाल को, रटि रटि होंहुं अधीर ॥

- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (66)

कब मैं निधिवन में वृक्ष की डाल पर तोता बनूँगा और श्री राधा-रमन लाल के नाम का रटन कर अधीर हो उठूँगा?