रसना एक नहीं शत कोटिक, शोभा अमित अपारी -  श्री सूरदास, सूर सागर

रसना एक नहीं शत कोटिक, शोभा अमित अपारी - श्री सूरदास, सूर सागर

रसना एक नहीं शत कोटिक, शोभा अमित अपारी ।
कृष्ण भक्ति दीजै श्री राधे, सूरदास बलिहारी ॥

- श्री सूरदास

हे श्री राधे, मेरी तो एक ही जिह्वा है न कि शत-कोटि, मैं किस प्रकार तुम्हारी अमित एवं अथाह शोभा का उससे वर्णन करूँ। कृपा कर मुझे कृष्ण-भक्ति दीजिए, मैं (सूरदास) सदा तुम पर बलिहारी जाता हूँ।