कोटि-कोटि मतिराम कहि, जतन करौ सब कोइ -  श्री मतिराम, मतिराम सतसई (70)

कोटि-कोटि मतिराम कहि, जतन करौ सब कोइ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (70)

कोटि-कोटि मतिराम कहि, जतन करौ सब कोइ।
फाटे मन अरु दूध में, नेह न कबहूँ होइ ॥

- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (70)
 
श्री मतिराम जी कहते हैं कि चाहे कोई करोड़ों यत्न क्यों न कर ले, फिर भी फटे दूध अर्थात् अशुद्ध मन से कभी भी श्री राधा-कृष्ण का निर्मल मक्खन अर्थात् प्रेम नहीं निकल सकता।