तन पुलकित रोमांच करि - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (24)

तन पुलकित रोमांच करि - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (24)

तन पुलकित रोमांच करि, नैनन नीर बहाव ।
प्रेम मगन उन्मत्त ह्वै, राधा राधा गाव ॥

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (24)

तन पुलकित हो कर रोमांचित हो उठे, आँखों से प्रेमाश्रुओं की धारा बहाते हुए, प्रेम में मग्न और मतवाले होकर बस निरंतर "राधा-राधा" नाम का गान करो।