(राग भीमपलासी, त्रिताल)
हमारी सर्वस राधारानी ।
जिनकी कृपा सों ही पायी वृंदावन रजधानी ॥ [1]
मो निर्धन को धन श्रीश्यामा, सेवाकुंज महारानी ।
श्रीगोपाल हित नवल प्रिया ने, विनती सुनी हम जानी ॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (119)
मेरी सर्वस्व तो केवल श्री राधारानी ही हैं जिनकी कृपा से ही मुझे उनकी राजधानी श्री धाम वृंदावन का वास मिला है । [1]
मुझ निर्धन का धन तो केवल राधारानी ही हैं जो सेवाकुंज की महारानी हैं । श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि मुझे यह अनुभव हो गया है कि नवल प्रियाजी (श्री राधा) ने मेरी विनती को सुन लिया है । [2]
हमारी सर्वस राधारानी ।
जिनकी कृपा सों ही पायी वृंदावन रजधानी ॥ [1]
मो निर्धन को धन श्रीश्यामा, सेवाकुंज महारानी ।
श्रीगोपाल हित नवल प्रिया ने, विनती सुनी हम जानी ॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (119)
मेरी सर्वस्व तो केवल श्री राधारानी ही हैं जिनकी कृपा से ही मुझे उनकी राजधानी श्री धाम वृंदावन का वास मिला है । [1]
मुझ निर्धन का धन तो केवल राधारानी ही हैं जो सेवाकुंज की महारानी हैं । श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि मुझे यह अनुभव हो गया है कि नवल प्रियाजी (श्री राधा) ने मेरी विनती को सुन लिया है । [2]

