नयनं गलदश्रुधारया वदनं गदगदरुद्धया गिरा ।
पुलकैर्निचितं वपुः कदा तव नाम-ग्रहणे भविष्यति ॥
- श्री चैतन्य महाप्रभु, शिक्षाष्टकम (6)
हे प्रभु ! आपका नाम लेने पर कब मेरे नेत्रों से अश्रुओं की धारा बहेगी, कब आपका नामोच्चारण मात्र से ही मेरा कंठ गद गद होकर अवरुद्ध हो जायेगा और मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा ।
पुलकैर्निचितं वपुः कदा तव नाम-ग्रहणे भविष्यति ॥
- श्री चैतन्य महाप्रभु, शिक्षाष्टकम (6)
हे प्रभु ! आपका नाम लेने पर कब मेरे नेत्रों से अश्रुओं की धारा बहेगी, कब आपका नामोच्चारण मात्र से ही मेरा कंठ गद गद होकर अवरुद्ध हो जायेगा और मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा ।

