अरे शीघ्रं शीघ्रं  -  श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.21)

अरे शीघ्रं शीघ्रं - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.21)

अरे शीघ्रं शीघ्रं सुतधन-कलत्रादि ममता
प्रताने कालोऽयं नहि वपुरिदं मृत्यनुगतम् ।
समस्तालभ्यानां परमिदमलभ्यं स्वकृपया
भुवि व्यक्त वृन्दाविपिनमभिधावाऽतिहठतः॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.21)

अरे! स्त्री, पुत्र, धनादि में ममता बढ़ाने का यह समय नहीं है, यह शरीर मृत्यु की ओर बढ़ रहा है । समस्त दुर्लभ वस्तुओं में भी अति सुदुर्लभ यह श्रीवृन्दावन अपनी कृपा से इस पृथ्वी पर प्रगट हुआ है, इसलिये शीघ्रातिशीघ्र श्रीवृन्दावन की ओर दौड़कर चल ।