तौ बलियै भलियै बनी नागर नन्दकिसोर - बिहारी लाल, बिहारी सतसई (708)

तौ बलियै भलियै बनी नागर नन्दकिसोर - बिहारी लाल, बिहारी सतसई (708)

तौ बलियै भलियै बनी, नागर नन्दकिसोर ।
जौ तुम नीकैं कै लख्यौ, मो करनी की ओर ॥

- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (708)

हे चतुर नन्दकिशोर, मैं बलैया लूँ, यदि तुम अच्छी प्रकार से मेरी करतूतों की ओर देखोगे अर्थात् मेरे अवगुणों पर विचारोगे, तब तो बस मेरी बिगड़ी खूब भली बनी! मेरा उद्धार हो चुका! (अर्थात् नहीं होगा।)