जिनके मुक्ति-पिशाचिनी, तन-मन रही समाइ।
सोई हरि सौं बिमुख है, फिर पाछै पछिताई॥
- ब्रज के दोहे
जिनके हृदय में मुक्ति की चाह रूपी चुड़ैल निवास करती है, वे हरि से निश्चित ही विमुख हो जाते हैं, और फिर पश्चाताप करते हैं।
सोई हरि सौं बिमुख है, फिर पाछै पछिताई॥
- ब्रज के दोहे
जिनके हृदय में मुक्ति की चाह रूपी चुड़ैल निवास करती है, वे हरि से निश्चित ही विमुख हो जाते हैं, और फिर पश्चाताप करते हैं।

