श्री राधा नाम रटो दिन रैन - श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (126)

श्री राधा नाम रटो दिन रैन - श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (126)

(राग कलावती व रामकली)
श्री राधा नाम रटो दिन रैन ॥ [1]
भव बाधा मिट जावे सारी, उपजै चित में चैन ।
सहज मिटे चँचलता मन की, नशै मोह मद मैन ॥ [2]
उज्वल रस हिय माहिं भरेगी, प्रिया कृपा सुख दैन ।
“रूपमाधुरी" रूप छटा में, छकै रहै नित नैन ॥ [3]

- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (126)

दिन रात "श्री राधा" नाम का रटन करो । [1]

जिसके प्रभाव से समस्त भव-बाधा मिट जाती है एवं चित्त को परम शांति प्राप्त होती है । मन की चँचलता सहज ही मिट जाती है, मोह, मद, काम आदि विकार नष्ट हो जाते हैं । [2]

श्री राधा नाम के प्रभाव से ह्रदय उज्वल रस से भर जायेगा एवं श्री प्रिया जू की कृपा परम सुख प्रदान करेगी । श्री रूपमाधुरी जी कहते हैं कि श्री राधा नाम के प्रभाव से आंखें श्री राधा के रूप छटा में नित्य छकी रहती हैं । [3]