जिह्वा राधा श्रुतौ राधा - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (2)

जिह्वा राधा श्रुतौ राधा - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (2)

जिह्वा राधा श्रुतौ राधा राधा नेत्रे हृदि स्थिता ।
सर्वाङ्गव्यापिनी राधा राधैवाराध्यते मया ॥

- ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (2)

श्री कृष्ण चंद्र कहते हैं कि मेरी जिह्वा में भी राधा है, कानों में भी राधा, नेत्रों में भी राधा, और ह्रदय में भी राधा स्थित है । मेरे सर्व अंगों में केवल श्री राधा ही व्याप्त है, श्री राधिका महारानी की ही मैं आराधना करता हूँ ।