प्रातहिं मंगल आरति कीजै ।
जुगलकिसोर रूप-रस-माते,
अद्भुत छबि नैंननि भरि लीजै ॥ [1]
ललिता ललित बजावति वीना,
गुन गावति सोइ जीवन जीजै ।
जै श्री रूपलाल हित मंगल जोरी,
निरखि प्रान न्यौछावर कीजै ॥ [2]
- श्री हित रूपलाल जी
प्रातः काल में ही श्री जुगल किशोर की मंगल आरती कीजिये जिनके अंग रूप एवं रस से छके हुए हैं । ऐसी अद्भुत छवि को अपने नेत्रों में सदा के लिए भर लीजिये । [1]
श्री ललिता जू मधुर वीणा बजा रही हैं एवं श्री श्यामाश्याम के गुणों का गान कर रही है जो उनके जीवन धन हैं । श्री हित रूपलाल जी कहते हैं "श्यामाश्याम की इस मंगलमयी जोड़ी को निरख कर अपने प्राणों को न्यौछावर कीजिए ।" [2]
जुगलकिसोर रूप-रस-माते,
अद्भुत छबि नैंननि भरि लीजै ॥ [1]
ललिता ललित बजावति वीना,
गुन गावति सोइ जीवन जीजै ।
जै श्री रूपलाल हित मंगल जोरी,
निरखि प्रान न्यौछावर कीजै ॥ [2]
- श्री हित रूपलाल जी
प्रातः काल में ही श्री जुगल किशोर की मंगल आरती कीजिये जिनके अंग रूप एवं रस से छके हुए हैं । ऐसी अद्भुत छवि को अपने नेत्रों में सदा के लिए भर लीजिये । [1]
श्री ललिता जू मधुर वीणा बजा रही हैं एवं श्री श्यामाश्याम के गुणों का गान कर रही है जो उनके जीवन धन हैं । श्री हित रूपलाल जी कहते हैं "श्यामाश्याम की इस मंगलमयी जोड़ी को निरख कर अपने प्राणों को न्यौछावर कीजिए ।" [2]

