लोक चतुर्दस ही सदा, हरि चरनन नित ध्यान ।
वहै कृष्ण राधे चरण, अलता देत सु आन ॥
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज शृंगार (112)
जिन श्री हरि की ऐसी महिमा है कि उनके चरणों का ध्यान चौदहों लोक नित्य करते हैं, वे श्री हरि, कृष्ण रूप में, वृंदावन की महारानी श्री राधारानी के चरणों में महावर लगाकर उनकी सेवा करते रहते हैं।
वहै कृष्ण राधे चरण, अलता देत सु आन ॥
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज शृंगार (112)
जिन श्री हरि की ऐसी महिमा है कि उनके चरणों का ध्यान चौदहों लोक नित्य करते हैं, वे श्री हरि, कृष्ण रूप में, वृंदावन की महारानी श्री राधारानी के चरणों में महावर लगाकर उनकी सेवा करते रहते हैं।

