मेरे तौ कुल पुज्ज तू, श्री वृषभान कुमारि - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

मेरे तौ कुल पुज्ज तू, श्री वृषभान कुमारि - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

मेरे तौ कुल पुज्ज तू, श्री वृषभान कुमारि ।
जग दुख हरनी राधिके, आयौ तेरे द्वार ॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद

हे किशोरीजी! मेरे कुल की पूज्यदेवी (कुलदेवी) तो आप ही हैं। समस्त जगत के दुखों का हरण करने वाली हे राधिका! अब मैं आपके द्वार आया हूँ।