तन मन कर आठौं जाम, आस राधे की मोकों

तन मन कर आठौं जाम, आस राधे की मोकों

तन मन कर आठौं जाम, आस राधे की मोकों,
आसरौ राधे कौ और ना पहिचान जू ॥

- श्री लालदास

आठों याम तन, मन से मुझे केवल राधा की ही आस है । मेरा आसरा भी श्री राधा है और इसके अतिरिक्त मेरी अन्य किसी से कोई पहिचान नहीं है । [3]