अप्सरा कुंड के आगे सुतल वन है, और पास में ही सुतल कुंड है । इस कुंड के बगल में श्री नाथजी मंदिर है । यह मंदिर सौ साल से भी कम पुराना है । श्री नाथजी मंदिर के आगे मणि कंदली गुफा है ।
ऐसी मान्यता है कि इस गुफा में श्री राधा कृष्ण मधुर लीलाएं करते थे । इस गुफा का मुख अब बंद कर दिया गया है । श्री चैतन्य महाप्रभु के परिकर गौड़ीय वैष्णव श्री राघव पण्डित इसी गुफा में भजन करते थे । इसी से इस गुफा का नाम राघव पंडित की गुफा हो गया । श्री राघव पंडित ब्रज में श्री कृष्ण की अधिकांश लीला स्थलियों को जानते थे । उनका वर्णन "गौर गणोद्देस दीपिका" में आठ मुख्य गोपियों में से एक, श्री चंपकलता सखी के रूप में किया गया है । श्रील जीव गोस्वामी ने श्रीनिवासाचार्य, श्रील नरोत्तम ठाकुर और श्री श्यामानन्द प्रभु को इन्हींके साथ ब्रजमण्डलकी परिक्रमा करायी थी । ये परम तत्त्वज्ञ एवं रसिक वैष्णव थे । "भक्तिरत्नाकर" ग्रन्थ में इनका उल्लेख है । इस गुफा के पास ही गोवर्धन पर्वतके ऊपर श्रीकृष्ण के मुकुट का चिह्न है ।
इसी गुफा में श्री कृष्ण के आदेश से श्री राम कृष्ण दास बाबा (पंडित बाबा) ने भी भजन किया था ।
स्थान :
राघव पंडित की गुफा पूँछरी का लौठा, गोवर्धन में स्थित है ।
ऐसी मान्यता है कि इस गुफा में श्री राधा कृष्ण मधुर लीलाएं करते थे । इस गुफा का मुख अब बंद कर दिया गया है । श्री चैतन्य महाप्रभु के परिकर गौड़ीय वैष्णव श्री राघव पण्डित इसी गुफा में भजन करते थे । इसी से इस गुफा का नाम राघव पंडित की गुफा हो गया । श्री राघव पंडित ब्रज में श्री कृष्ण की अधिकांश लीला स्थलियों को जानते थे । उनका वर्णन "गौर गणोद्देस दीपिका" में आठ मुख्य गोपियों में से एक, श्री चंपकलता सखी के रूप में किया गया है । श्रील जीव गोस्वामी ने श्रीनिवासाचार्य, श्रील नरोत्तम ठाकुर और श्री श्यामानन्द प्रभु को इन्हींके साथ ब्रजमण्डलकी परिक्रमा करायी थी । ये परम तत्त्वज्ञ एवं रसिक वैष्णव थे । "भक्तिरत्नाकर" ग्रन्थ में इनका उल्लेख है । इस गुफा के पास ही गोवर्धन पर्वतके ऊपर श्रीकृष्ण के मुकुट का चिह्न है ।
इसी गुफा में श्री कृष्ण के आदेश से श्री राम कृष्ण दास बाबा (पंडित बाबा) ने भी भजन किया था ।
स्थान :
राघव पंडित की गुफा पूँछरी का लौठा, गोवर्धन में स्थित है ।

