गर्व करो जिनि भूलि कोउ - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (17.18)

गर्व करो जिनि भूलि कोउ - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (17.18)

गर्व करो जिनि भूलि कोउ, गृह-जन-धन को पाई ।
'नंद' इंद्र ते को बड़ो, दीनो धूरि मिलाइ ॥

- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (17.18)

यदि किसी जीव के मन में घर-परिवार, जन-सम्पत्ति या वैभव का अभिमान उत्पन्न हो जाए, तो उसे स्मरण करना चाहिए कि स्वर्ग के सम्राट इंद्र का गर्व भी भगवान कृष्ण ने क्षणभर में धूल में मिला दिया था। अतः अहंकार का त्याग ही कल्याण का मार्ग है।