राधाप्रियमयूरस्य यत्र राधेक्षणप्रभम् । विभर्ति शिरसा कृष्णऽस्तस्य चूड़ानिभं सतः ॥ - कृष्णयामल तन्त्र (16.7) मोर के पंख में राधा के नेत्रों की छटा का दिग्दर्शन होता है, अत: मोरपंख को कृष्ण अपने मुकुट पर धारण करते हैं ।