श्री हरिदास उपासना, लख में पावै एक ।
रस रीति हूँ पावै नहीं, पचि पचि मरे अनेक ॥
- श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (10)
स्वामी श्री हरिदास जी की अखंड नित्य-विहारमयी उपासना अत्यंत दुर्लभ है— लाखों में कोई एक ही उसे समझ और धारण कर पाता है। इस दिव्य रस-परंपरा को प्राप्त करना सहज नहीं; असंख्य साधक प्रयास कर चले गए, परंतु विरले ही उसके अधिकारी बने।

