(राग विहाग त्रिताल)
हमारो धन राधा-राधा नाम ।
नामहिं जीवन धन हैं अब तो, और ठौर नहिं ठाम ॥ [1]
रसना नाम सुधा जब पीवै, उर नाँचै श्रीधाम ।
राधा नामहिं मीठो लागै, भूले सब ही काम ॥ [2]
अरे बावरे छाँड़ि नाम मणि, जाँचत काहे छदाम ।
श्रीगोपाल हित जपौ निरन्तर, तब मिलि हैं बिश्राम ॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (77)
मेरा एकमात्र धन श्री राधा नाम है । यह नाम ही मेरा जीवन-धन है, जिसके अतिरिक्त मेरा और कोई ठौर कहीं नहीं है । [1]
हमारो धन राधा-राधा नाम ।
नामहिं जीवन धन हैं अब तो, और ठौर नहिं ठाम ॥ [1]
रसना नाम सुधा जब पीवै, उर नाँचै श्रीधाम ।
राधा नामहिं मीठो लागै, भूले सब ही काम ॥ [2]
अरे बावरे छाँड़ि नाम मणि, जाँचत काहे छदाम ।
श्रीगोपाल हित जपौ निरन्तर, तब मिलि हैं बिश्राम ॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (77)
मेरा एकमात्र धन श्री राधा नाम है । यह नाम ही मेरा जीवन-धन है, जिसके अतिरिक्त मेरा और कोई ठौर कहीं नहीं है । [1]
जब मेरी रसना "राधा" नाम के रस का पान करती है तब मेरे ह्रदय में श्री वृन्दावन दृष्टिगोचर होने लगता है । मुझे तो श्री राधा नाम ही मीठा लगता है, जिसके समक्ष मैं सब भूल जाता हूँ । [2]
अरे बावरे, जब तेरे पास नाम मणि है, तो उसको छोड़कर क्यों कौड़ी के पीछे भागता है । श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि "श्री राधा” नाम का निरंतर जप कर, तभी विश्राम मिलेगा । [3]

![हमारो धन राधा-राधा नाम - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (77)](https://images.brajrasik.org/6436cef5eefc300008d351f9-m.jpeg)