नरोत्तमदासे कय, एइ जेन मोर हये - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (57)

नरोत्तमदासे कय, एइ जेन मोर हये - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (57)

नरोत्तमदासे कय, एइ जेन मोर हये, व्रजपुरे अनुरागे वास ।
सखीगण-गणनाते, आमारे लिखिवे ताते, तबहि पूरव अभिलाष ॥

- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (57)

श्री नरोत्तम दास कहते हैं - मैं बस यही कहता हूँ कि व्रज में मेरा अनुरागमय वास हो। सखीगण की दासी होने के नाते श्रीप्रिया प्रीतम भी मुझे अपनी दासी मान लें तभी मेरी मनोभिलाष पूर्ण होगी ।