ब्रज-रज मैं लोटत रहौ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25)

ब्रज-रज मैं लोटत रहौ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25)

ब्रज-रज मैं लोटत रहौ, छोड़ि सकल जंजाल ।
चरन राखि विश्वास दृढ़, भजु राधा-गोपाल ॥

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (25)

संसार के सभी जंजालों को छोड़कर ब्रज-रज में लोटते रहो। श्री राधा-गोपाल के चरणकमलों में दृढ़ विश्वास रखकर उनका भजन करो।