राधाराधेति यो ब्रूयात् स्मरणं कुरुते नरः ।
सर्व्वतीर्थेषु संस्कारात् सर्व्वविद्याप्रयत्नवान् ॥
- पद्म पुराण, उत्तर खंड (163.1)
श्री शिव जी देवर्षि नारद से कहते हैं- जो मनुष्य 'राधा-राधा' कहता है तथा उनका स्मरण करता है, वह सब तीर्थों के संस्कार से युक्त होकर सब प्रकार की विद्या की प्राप्ति में प्रयत्नवान् बनता है।

