(राग धनाश्री, ताल चौतला)
जय राधे, श्रीकुञ्ज बिहारिनि, बेगहि श्रीब्रजबास दीजिये ।
बेली बिटप जमुनजल औ रज, संत संग रँग भीजिये ॥ [1]
बहु दुख सह्यौ, सहौं अब कबलौं अभय सबनि सों कीजिये ।
सरनागतकी लाज आपको, कृपा करो तो जीजिये ॥ [2]
जो कछु चूक परी है अबलौं, सो सब छमा करीजिये ।
'जुगलप्रिया' अनुचरी आपकी, बिनय स्रवन सुनि लीजिये ॥ [3]
- श्री जुगलप्रिया जी
हे कुञ्ज बिहारिणी श्री राधा, आपकी जय हो, मुझे शीघ्र श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये । वहाँ के लता-वृक्ष, यमुना जल, रज तथा सत्संग के रंग में मैं भीग जाऊंगा । [1]
मैंने बहुत दुःख सहा है, अब कब तक और सहूँ, मुझे इन सब से अभय कर दीजिये । हे श्री राधा, आपके शरणागत की लाज आपके हाथ है, आप कृपा करोगी तो मेरा कल्याण होगा । [2]
श्री जुगलप्रिया जी कहते हैं कि "हे श्री राधा, मुझसे अब तक जो अपराध हुए हैं उन्हें कृपया क्षमा कीजिये । मैं आपकी अनुचरी हूँ, कृपा कर मेरी विनती सुन लीजिये ।" [3]
जय राधे, श्रीकुञ्ज बिहारिनि, बेगहि श्रीब्रजबास दीजिये ।
बेली बिटप जमुनजल औ रज, संत संग रँग भीजिये ॥ [1]
बहु दुख सह्यौ, सहौं अब कबलौं अभय सबनि सों कीजिये ।
सरनागतकी लाज आपको, कृपा करो तो जीजिये ॥ [2]
जो कछु चूक परी है अबलौं, सो सब छमा करीजिये ।
'जुगलप्रिया' अनुचरी आपकी, बिनय स्रवन सुनि लीजिये ॥ [3]
- श्री जुगलप्रिया जी
हे कुञ्ज बिहारिणी श्री राधा, आपकी जय हो, मुझे शीघ्र श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये । वहाँ के लता-वृक्ष, यमुना जल, रज तथा सत्संग के रंग में मैं भीग जाऊंगा । [1]
मैंने बहुत दुःख सहा है, अब कब तक और सहूँ, मुझे इन सब से अभय कर दीजिये । हे श्री राधा, आपके शरणागत की लाज आपके हाथ है, आप कृपा करोगी तो मेरा कल्याण होगा । [2]
श्री जुगलप्रिया जी कहते हैं कि "हे श्री राधा, मुझसे अब तक जो अपराध हुए हैं उन्हें कृपया क्षमा कीजिये । मैं आपकी अनुचरी हूँ, कृपा कर मेरी विनती सुन लीजिये ।" [3]

