प्रेम रंग सौं रँगे जे - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (45)

प्रेम रंग सौं रँगे जे - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (45)

प्रेम रंग सौं रँगे जे, नहिं आनत उर आन।
अद्भुत जुगल विहार रस, तेई करिहैं पान ॥

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (45)

जिनके चित्त युयुगल किशोर के प्रेम-रंग में रँगे हैं और जो इस रस के अतिरिक्त हृदय में किसी अन्य साधन-भजन को स्थान नहीं देते, एकमात्र वही अद्भुत वृंदावनीय युगल-विहार रस-पान के वास्तविक अधिकारी हैं।