विधि निषेध श्रुति वेदकी, मेड़ देत सब मेट ।
नारायण जाके बदन, लागत प्रेम चपेट ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (147)
जिस साधक के हृदय में श्री श्यामा-श्याम के प्रेम की सशक्त चपेट लग जाती है, उसके भीतर वेद और श्रुति द्वारा निर्दिष्ट सभी विधि-निषेध की सीमाएँ स्वतः विलीन हो जाती हैं।
नारायण जाके बदन, लागत प्रेम चपेट ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (147)
जिस साधक के हृदय में श्री श्यामा-श्याम के प्रेम की सशक्त चपेट लग जाती है, उसके भीतर वेद और श्रुति द्वारा निर्दिष्ट सभी विधि-निषेध की सीमाएँ स्वतः विलीन हो जाती हैं।

