धन धन वृन्दावन के मोर ।
कुञ्जन ऊपर नृत्य करत हैं जिनको देखैं नन्द किसोर ॥ [1]
जिनकी बोली लगै सुहाई कूंकैं निशदिन हरि की ओर ।
अभयराम ऐहू बड़भागी इनके दरसन कीजै भोर ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (62)
श्री वृन्दावन के मोर धन्य हैं, जो कुंजों के ऊपर नृत्य करते हैं एवं जिन्हें श्री कृष्ण देखते हैं । [1]
इनकी बोली बड़ी सुहावनी लगती है, जो निशिदिन हरि की ओर मुख करके कुहुकते हैं । श्री अभयराम कहते हैं "वृन्दावन के मोर बड़े भाग्यवान हैं, नित्य इनके भोर में दर्शन किया करो ।" [2]
कुञ्जन ऊपर नृत्य करत हैं जिनको देखैं नन्द किसोर ॥ [1]
जिनकी बोली लगै सुहाई कूंकैं निशदिन हरि की ओर ।
अभयराम ऐहू बड़भागी इनके दरसन कीजै भोर ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (62)
श्री वृन्दावन के मोर धन्य हैं, जो कुंजों के ऊपर नृत्य करते हैं एवं जिन्हें श्री कृष्ण देखते हैं । [1]
इनकी बोली बड़ी सुहावनी लगती है, जो निशिदिन हरि की ओर मुख करके कुहुकते हैं । श्री अभयराम कहते हैं "वृन्दावन के मोर बड़े भाग्यवान हैं, नित्य इनके भोर में दर्शन किया करो ।" [2]

