बैठे लेटे चालते, खान पान व्यौपार ।
जहाँ तहाँ सुमिरन करै, “सहजो" हिय निहार ॥
- श्री सहजो बाई
बैठते, लेटते, चलते, खाते-पीते या व्यापार करते समय — जीवन की प्रत्येक अवस्था और प्रत्येक स्थान पर — श्री श्यामा-श्याम का अखंड, अनन्य भाव से स्मरण करते रहना ही साधक का परम कर्तव्य है।
जहाँ तहाँ सुमिरन करै, “सहजो" हिय निहार ॥
- श्री सहजो बाई
बैठते, लेटते, चलते, खाते-पीते या व्यापार करते समय — जीवन की प्रत्येक अवस्था और प्रत्येक स्थान पर — श्री श्यामा-श्याम का अखंड, अनन्य भाव से स्मरण करते रहना ही साधक का परम कर्तव्य है।

