कर सखि वृंदावन सों हेत - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (240)

कर सखि वृंदावन सों हेत - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (240)

(राग जंगला)
कर सखि वृंदावन सों हेत ।
तजि परपंच अरुन हरियारे कारे पीरे सेत ॥ [1]
ललितकिशोरी लालरुप लख वननिकुंज संकेत ।
दारा सुत जो संग न छाँडै वसिये कुटुम समेत ॥ [2]

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (240)

अरी सखी, समस्त प्रकार के प्रपंचों (अर्थात् सात्विक, राजस, तामस) से मन को हटा कर श्री वृंदावन धाम से नेह कर । [1]

श्री प्रिया लाल के चरणों से अंकित इस निकुंज भूमि श्री वृंदावन धाम में उनके दिव्य रूप का अवलोकन कर । यदि तू अपनी पत्नी, बच्चों का संग नहीं त्याग सकता तो पूरे परिवार सहित श्री वृंदावन का वास कर । [2]