कारज कारन रूप यह - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (47)

कारज कारन रूप यह - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (47)

कारज कारन रूप यह, प्रेम कहै रसखान ।
कर्ता कर्म क्रिया करन, आपहि प्रेम बखान ॥

- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (47)

रसखान के अनुसार प्रेम ही सृष्टि का मूल कारण है। जगत की उत्पत्ति और उसकी समस्त क्रियाएँ प्रेम से ही हुई हैं। वही प्रेम कर्ता भी है, कर्म भी है, क्रिया भी है और परमात्मा का वास्तविक स्वरूप भी।