ब्रजबिलास रसरीति को, करियै कहा बखान ।
कृष्णचंद क्रीड़त जहाँ, पूरन - कला - निधान ॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (16)
ब्रज-विलास की रस-रीति का वर्णन भला कैसे संभव है, जहाँ पूर्ण-कला-निधान भगवान श्रीकृष्णचंद्र ने अपनी दिव्य क्रीड़ाओं से उस भूमि को पावन किया है?
कृष्णचंद क्रीड़त जहाँ, पूरन - कला - निधान ॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (16)
ब्रज-विलास की रस-रीति का वर्णन भला कैसे संभव है, जहाँ पूर्ण-कला-निधान भगवान श्रीकृष्णचंद्र ने अपनी दिव्य क्रीड़ाओं से उस भूमि को पावन किया है?

