जे श्रीराधा चरन उपासी
तिन चरनन में निस दिन रम रे । [1]
तिन पद-कमल-प्रसाद सुखित भये
रही नाहिं कछु मन की गम रे ॥ [2]
कुँवरि चरन सेवा की लाइक
कहै ‘वंशी’ सदृष्य अधम रे ॥ [3]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (9)
जो श्री राधा के चरणों के अनन्य उपासक हैं उनके चरणों में नित्य सेवा करनी चाहिए । [1]
उनके चरण कमलों का प्रसाद पाकर ही समस्त प्रकार के मन के विकार एवं दुखों का अंत होता है । [2]
श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि अरे अधम, श्री राधा उपासकों के चरणों की सेवा के प्रताप से ही श्री राधा की कृपा प्राप्त होती है अर्थात् श्री राधा उपासकों की सेवा का महत्व श्री राधा की सेवा से भी अधिक है । [3]
तिन चरनन में निस दिन रम रे । [1]
तिन पद-कमल-प्रसाद सुखित भये
रही नाहिं कछु मन की गम रे ॥ [2]
कुँवरि चरन सेवा की लाइक
कहै ‘वंशी’ सदृष्य अधम रे ॥ [3]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (9)
जो श्री राधा के चरणों के अनन्य उपासक हैं उनके चरणों में नित्य सेवा करनी चाहिए । [1]
उनके चरण कमलों का प्रसाद पाकर ही समस्त प्रकार के मन के विकार एवं दुखों का अंत होता है । [2]
श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि अरे अधम, श्री राधा उपासकों के चरणों की सेवा के प्रताप से ही श्री राधा की कृपा प्राप्त होती है अर्थात् श्री राधा उपासकों की सेवा का महत्व श्री राधा की सेवा से भी अधिक है । [3]

