जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह जी ने अपने गुरु ब्रह्मचारी श्री गिरिधारीशरण जी के प्रसन्नता हेतु इस मंदिर का निर्माण करवाया था । इसमें बहुत रुपये व्यय हुआ एवं लगभग तीस वर्षों में इस भव्य मन्दिर का निर्माण किया गया । हज़ारों मजदुर एवं कारीगरों ने कुशलता पूर्वक काम किया । यह मंदिर राजस्थान के लाल पत्थर से बना है । मंदिर के प्रांगण में 16 खम्बे हैं जिनमें सुन्दर नक्काशी की गयी है । मूल मन्दिर में तीन द्वार हैं । उत्तरी प्रकोष्ठ में श्री आनन्दबिहारी जी, बीच के प्रकोष्ठ में श्री राधामाधव जी तथा दक्षिणी प्रकोष्ठ में श्री नित्य गोपाल जी, श्री गिरीधारी जी, श्री सनक - सनातन - सनन्दन-सनतकुमार और श्री नारद जी की मूर्तियाँ विराजमान हैं । सन् 1916 ई. में इस मन्दिर में विग्रहों की प्रतिष्ठा हुई थी ।
मंदिर के दक्षिण भाग में श्रीपाद बाबा गोशाला है जिसमें सात हज़ार गायों की सेवा होती है । लाल पत्थर को वृन्दावन लाने के लिए महाराज माधोसिंह ने मथुरा से वृन्दावन के लिए रेल मार्ग का निर्माण करवाया था । मंदिर का क्षेत्रफल करीब 100 एकड़ है । यह मंदिर राजस्थान के प्राचीन कला को दर्शाता है ।
वर्त्तमान में इस मंदिर का सञ्चालन राजस्थान सरकार द्वारा किया जाता है ।
स्थान :
जयपुरवाला मन्दिर मथुरा-वृंदावन मार्ग में किशोर पुरा, वृंदावन में स्थित है ।
मंदिर के दक्षिण भाग में श्रीपाद बाबा गोशाला है जिसमें सात हज़ार गायों की सेवा होती है । लाल पत्थर को वृन्दावन लाने के लिए महाराज माधोसिंह ने मथुरा से वृन्दावन के लिए रेल मार्ग का निर्माण करवाया था । मंदिर का क्षेत्रफल करीब 100 एकड़ है । यह मंदिर राजस्थान के प्राचीन कला को दर्शाता है ।
वर्त्तमान में इस मंदिर का सञ्चालन राजस्थान सरकार द्वारा किया जाता है ।
स्थान :
जयपुरवाला मन्दिर मथुरा-वृंदावन मार्ग में किशोर पुरा, वृंदावन में स्थित है ।

