यहै उपदेस उपाइ श्रीबिहारिनिदासि कृपा तैं जानैं ।
नित्य सिद्ध बिनु नागरीदास, कहा कोउ पहिचानैं ॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी (5)
इस अद्भुत नित्य-विहार रूपी सर्वोपरि रस के उपदेश को एक मात्र गुरुदेव (श्री बिहारिन दास जी) की कृपा से ही समझा जा सकता है, क्योंकि नित्य-सिद्धों (एवं उनके कृपा-पात्र जनों) के अतिरिक्त इस मर्म को और कोई नहीं समझ सकता।
नित्य सिद्ध बिनु नागरीदास, कहा कोउ पहिचानैं ॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी (5)
इस अद्भुत नित्य-विहार रूपी सर्वोपरि रस के उपदेश को एक मात्र गुरुदेव (श्री बिहारिन दास जी) की कृपा से ही समझा जा सकता है, क्योंकि नित्य-सिद्धों (एवं उनके कृपा-पात्र जनों) के अतिरिक्त इस मर्म को और कोई नहीं समझ सकता।

