चाल हंस गति निरख कै सखी नयन हर्षाय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (82)

चाल हंस गति निरख कै सखी नयन हर्षाय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (82)

चाल हंस गति निरख कै, सखी नयन हर्षाय ।
निरखत चन्द्र चकोर इव, दोउन नयन बसाय ॥

- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (82)

श्री प्रिया-प्रियतम की हंस-गति की मधुर चाल को देखकर सखी के नयन हर्षित हो जाते हैं और वे दोनों को अपने नयनों में उसी प्रकार बसा लेती है, जिस प्रकार चकोर के नयनों में चंद्र बसा होता है।