वृन्दावन विहरत दोउ, पगे प्रीत रस रंग ।
इक रस आनंद जहाँ नित, 'आत्तमराम इकंग' ॥
- श्री आत्तमराम इकंग (शुक संप्रदाय के भक्त)
श्री राधा-कृष्ण दिव्य प्रेम-रस में पूर्णतः निमग्न होकर वृंदावन के निकुंजों में नित्य विहार करते हैं। वहाँ नित्य एकरस आनंद की वर्षा होती रहती है, जिसमें सखियाँ सदैव सखियाँ नित्य भींजी रहती हैं।
इक रस आनंद जहाँ नित, 'आत्तमराम इकंग' ॥
- श्री आत्तमराम इकंग (शुक संप्रदाय के भक्त)
श्री राधा-कृष्ण दिव्य प्रेम-रस में पूर्णतः निमग्न होकर वृंदावन के निकुंजों में नित्य विहार करते हैं। वहाँ नित्य एकरस आनंद की वर्षा होती रहती है, जिसमें सखियाँ सदैव सखियाँ नित्य भींजी रहती हैं।

