आवति बाल लाल रंग भीनी - श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी

आवति बाल लाल रंग भीनी - श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी

(राग देवगिरी)
आवति बाल लाल रंग भीनी ।
गावति चुटकिन ताल लगावति हियहिलगावति लचकति अति कटि खीनी ॥ [1]
देवगिरी की ताननि की लचि लचकावनि पिय प्राननि लचकनि लीनी ।
वल्लभ रसिक विचार विसारि विहारनि पै तन वारि हारि लिखि दीनी ॥ [2]

- श्री वल्लभ रसिक, श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी

श्री श्यामा जू श्री श्यामसुंदर के प्रेम रस में भींजी हुई आ रही हैं । गान करते हुए वे चुटकी लेकर ताल दे रही हैं, उनकी सुगठित कटी प्रदेश लचक रही है, जिसकी छवि सबके ह्रदय को मोहनेवाली है । [1]

श्री राधा राग देवगिरी के तान अलाप रही हैं, जिसकी श्रवण माधुरी श्री श्यामसुंदर के प्राणों को आकर्षित कर रही है । श्री वल्लभरासिक जी कहते हैं कि "रसिक श्री कृष्ण अपनी सुध-बुध खोकर श्री राधा पे अपने तन को न्योंछावर करते हैं और अपनी हार को प्रमाणित करते हैं ।" [2]