नित बिहार गोपाल लाल संग - श्री सूरदास

नित बिहार गोपाल लाल संग - श्री सूरदास

नित बिहार गोपाल लाल संग, वृन्दावन रजधानी ।
जगनायक जगदीस पियारी, जगत जननि जगरानी ॥ [1]
अगतिनि की गति, भक्तनि की पति, राधा मंगलदानी ।
असरन सरनी, भव-भय- हरनी, वेद पुरान बखानी ॥ [2]
रसना एक नही सत कोटिक, सोभा अमित अपार ।
कृष्ण-भक्ति दीजै श्रीराधे सूरदास बलिहार ॥ [3]

- श्री सूरदास

जगनायक, जगदीश श्री कृष्ण की प्यारी, जगतजननी, जग महारानी, श्री राधा श्री कृष्ण के संग श्री वृन्दावन राजधानी में नित्य विहार लीला परायण हैं । [1]

जिसकी कोई गति नहीं उसपर कृपा करने वाली, भक्तों की प्राणाराध्य, श्री राधा मंगल को प्रदान करने वाली हैं, जो पतितों की शरणागत वत्सल हैं, भवसागर के भय को हरने वाली हैं, जिनकी महिमा का गान वेद-पुराण करते हैं । [2]

श्री सूरदास कहते हैं कि "हे श्री राधे, मेरी तो एक ही जिह्वा है न कि शत कोटि, मैं किस प्रकार तुम्हारी अमित एवं अथाह शोभा का उससे वर्णन करूँ । कृपा कर मुझे कृष्ण भक्ति दीजिए, मैं सदा तुम पर बलिहारी जाता हूँ ।" [3]