कृष्ण प्रिया सखी भाव - सनत्कुमार संहिता (36.134)

कृष्ण प्रिया सखी भाव - सनत्कुमार संहिता (36.134)

कृष्ण प्रिया सखी भाव समाश्रित्य प्रयत्नत: ।
तयो: सेवां प्रकुर्वीत दिवानत्तमतन्द्रित: ॥

- सनत्कुमार संहिता (36.134)

साधक को अंतस्चिंतित (मानसिक) देह से श्री कृष्ण प्रेयसी श्री राधिका की सखी भाव को यत्न पूर्वक आश्रय करके, आलस को त्याग कर, अहर्निश उन दोनों (राधा कृष्ण) की सेवा में लग जाना चाहिए ।