कृष्ण: सख्यश्च राधाया: भक्ता: राधापदाश्रया: ।
तदभक्त भावत: सेव्या नमस्या राधिकाश्रितै : ॥
- श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (5)
श्री राधा की सेवा, एवं वंदना उसी भाव से करना चाहिए जिस भाव से श्री कृष्ण एवं उनके चरणों के आश्रित अनन्य भक्त ललिता आदि करते हैं ।
तदभक्त भावत: सेव्या नमस्या राधिकाश्रितै : ॥
- श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (5)
श्री राधा की सेवा, एवं वंदना उसी भाव से करना चाहिए जिस भाव से श्री कृष्ण एवं उनके चरणों के आश्रित अनन्य भक्त ललिता आदि करते हैं ।

