दीनबंधु दीनानाथ रमानाथ ब्रजनाथ,
राधानाथ मो अनाथ की सहाय कीजिये। [1]
तात मात भ्रात कुलदेव गुरुदेव स्वामी,
नातो तुम ही सो मो विनय सुनि लीजिये॥ [2]
रीझिवे निहारि देर कीजिये न कहूँ अब,
दीन दास जानि मोही अपनाय लीजिए। [3]
कीजिये कृपा कृपाल साँवरे बिहारीलाल,
मेटि दुख जाल वास वृन्दावन दीजिये॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
हे श्री कृष्ण! तुम दीनबंधु, दीनानाथ, रमानाथ, ब्रजनाथ, एवं राधानाथ हो, कृपा कर मुझ अनाथ की भी तो सहायता करो। [1]
तुम ही मेरे पिता, माता, भाई, कुलदेव, गुरुदेव, स्वामी एवं इष्टदेव हो ! केवल तुमसे ही मैंने समस्त नाते मानें हैं, अत: मेरी विनती को तुम नहीं सुनोगे तो और कौन सुनेगा ? [2]
मुझ पर रीझिये प्रभु और मेरी दशा की ओर निहार कर अब तनिक भी देर न कीजिए और इस दीन को अपना दास जान मुझे अपना लीजिए। [3]
हे परम कृपाल, बाँके बिहारी लाल! कृपा कर समस्त दुखों के जाल (मायिक नाते) को मिटाकर मुझे अखंड वृंदावन वास प्रदान कीजिए। [4]
राधानाथ मो अनाथ की सहाय कीजिये। [1]
तात मात भ्रात कुलदेव गुरुदेव स्वामी,
नातो तुम ही सो मो विनय सुनि लीजिये॥ [2]
रीझिवे निहारि देर कीजिये न कहूँ अब,
दीन दास जानि मोही अपनाय लीजिए। [3]
कीजिये कृपा कृपाल साँवरे बिहारीलाल,
मेटि दुख जाल वास वृन्दावन दीजिये॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
हे श्री कृष्ण! तुम दीनबंधु, दीनानाथ, रमानाथ, ब्रजनाथ, एवं राधानाथ हो, कृपा कर मुझ अनाथ की भी तो सहायता करो। [1]
तुम ही मेरे पिता, माता, भाई, कुलदेव, गुरुदेव, स्वामी एवं इष्टदेव हो ! केवल तुमसे ही मैंने समस्त नाते मानें हैं, अत: मेरी विनती को तुम नहीं सुनोगे तो और कौन सुनेगा ? [2]
मुझ पर रीझिये प्रभु और मेरी दशा की ओर निहार कर अब तनिक भी देर न कीजिए और इस दीन को अपना दास जान मुझे अपना लीजिए। [3]
हे परम कृपाल, बाँके बिहारी लाल! कृपा कर समस्त दुखों के जाल (मायिक नाते) को मिटाकर मुझे अखंड वृंदावन वास प्रदान कीजिए। [4]

