अंग अंग सोभा जु पर - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (56)

अंग अंग सोभा जु पर - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (56)

अंग अंग सोभा जु पर, वारौं काम करोरि ।
सुनी न हूँ देखी कहूँ, ऐसी अद्भुत जोरि ॥

- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (56)

श्री राधा-कृष्ण के अंग-प्रत्यंगों की अनुपम शोभा पर करोड़ों कामदेवों को अर्पित किया जा सकता है। ऐसी अद्वितीय युगल-जोड़ी न तो कभी सुनी गई और न ही कहीं देखी गई।