आवैं दौर दौर दारा द्वार महारानी जू के,
रूप कौं निहारैं प्रान बारैं विमला सी हैं। [1]
रती सी गिरा सी गिरजा सी सुखरासी आसी,
रंभा सी रमा सी कर जोरत दमा सी हैं॥ [2]
आई सिरमौर बासी जेती लोक लोकन की,
'लाल बलबीर' कोटि ससि सी प्रकासी हैं। [3]
पासी हैं न कोऊ सम सुखमा अपार राजैं,
सब में अधिक एक राधे रूप रासी हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (14)
श्री राधा महारानी जू के द्वार राजा एवं धनी जन भाग भाग कर आते हैं। विमला सी स्त्रियाँ जिनके रूप को निहार कर अपने प्राणों को उनपर न्यौछवार करती हैं। [1]
रति, गिरा, गिरजा, रम्भा, रमा आदि स्त्रियाँ भी जिनके आगे दोनों हाथों को जोड़े खड़ी रहती हैं। [2]
कोटि चंद्रमाओं के समान तेज वाली श्री राधा के दर्शन करने विभिन्न दिव्य लोकों में निवास करने वाले श्रेष्ठ प्राणी आते हैं। [3]
वे भी श्री राधा की अपार उज्जवल रूप की सुषमा के समक्ष शून्य लगते हैं। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि रूप की राशी श्री राधा का सौंदर्य अतुलनीय है (अर्थात् सब से अधिक है)। [4]
रूप कौं निहारैं प्रान बारैं विमला सी हैं। [1]
रती सी गिरा सी गिरजा सी सुखरासी आसी,
रंभा सी रमा सी कर जोरत दमा सी हैं॥ [2]
आई सिरमौर बासी जेती लोक लोकन की,
'लाल बलबीर' कोटि ससि सी प्रकासी हैं। [3]
पासी हैं न कोऊ सम सुखमा अपार राजैं,
सब में अधिक एक राधे रूप रासी हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (14)
श्री राधा महारानी जू के द्वार राजा एवं धनी जन भाग भाग कर आते हैं। विमला सी स्त्रियाँ जिनके रूप को निहार कर अपने प्राणों को उनपर न्यौछवार करती हैं। [1]
रति, गिरा, गिरजा, रम्भा, रमा आदि स्त्रियाँ भी जिनके आगे दोनों हाथों को जोड़े खड़ी रहती हैं। [2]
कोटि चंद्रमाओं के समान तेज वाली श्री राधा के दर्शन करने विभिन्न दिव्य लोकों में निवास करने वाले श्रेष्ठ प्राणी आते हैं। [3]
वे भी श्री राधा की अपार उज्जवल रूप की सुषमा के समक्ष शून्य लगते हैं। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि रूप की राशी श्री राधा का सौंदर्य अतुलनीय है (अर्थात् सब से अधिक है)। [4]

